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Bhim Sain Sharma


नाम                    -  भीम सैन शर्मा                
पिता का नाम      -   चंदगी राम शर्मा             
पिता का नाम       -   चंदगी राम शर्मा             
रैंक                     -  एच/लैफ्टिनैंट (ई.एम.ई) (भारतीय सेना)
जन्मतिथी             -  अप्रैल 01, 1950         
भर्ती तिथी           -  जनवरी 27, 1969         
सेवानिवृत तिथी  -  फरवरी 1, 1997           


                     लालावास के एक मध्यम वर्ग के किसान श्री चन्दगी राम शर्मा के घर 1950 में भीम सैन शर्मा के रूप में पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। श्री चन्दगी राम शर्मा एक मेहनती किसान थे। खेती ही उनकी आजिविका का एकमात्र साधन था। उनके सपनों को साकार करते हुए मात्र 19 वर्ष की आयु में भीम सैन शर्मा ने भारतीय सेना में भर्ती होकर अपना पहला सफल कदम रखा तथा अपनी एक अनुठी जिंदगी की शुरूआत की। भीम सैन शर्मा ने भारतीय सेना में ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी अपनी पहलवानी के जौहर बिखेरते हुए किर्तीमान स्थापित कर क्षेत्र में परचम लहराया।
भीम सैन शर्मा के चाचाजी श्री हुक्मीचंद आर्य भी एक प्रसि़द्ध भजनोपदेशक थे। उनकी ख्याति आज भी हरियाणा समेत राजस्थान में दूर-दूर तक विद्यमान है। पाँच भाइयों की माताजी श्रीमती लिछमी देवी के साथ-साथ भीम सैन शर्मा की पत्नी श्रीमती लक्ष्मी देवी भी धार्मिक प्रवृति की महिला है। उनके दो बेटे संजय शर्मा व राकेश शर्मा तथा तीन बेटियां संतोष, मंजु व अंजु है। भीम सैन शर्मा आज भी एक हृष्ट पुष्ट, एवं स्वस्थ शरीर के धनी है। आज भी वे सुबह 4 बजे उठकर लालावास से सटे गाँवों तक दौड़ लगाते हुए अपनी दिनचर्या का श्रीगणेश करते है। वे आज भी अपने वाकयो को युवाओं के साथ सांझा करते हुए उन्हें प्ररित करते है।
भीम सैन शर्मा की कलम से...
  • 1971 में भारत का युद्ध पाकिस्तान के साथ हुआ। उस समय मैनें डेरा बाबा नानक बोर्डर पर मोर्चा सम्भाल रखा था। 1971 में 3 दिसम्बर से 15 दिसम्बर तक लगातार 13 दिनों तक युद्ध चला। इस दौरान बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद करवाया गया। इस युद्ध में 93 हजार पाकिस्तान के जवान जे.सी.ओ. ऑफिसर, आर्मी कमांडर, लैफ्टिनेंट जनरल, समेत सभी को गिरफ्तार करके देहली लाया गया।
  • सन् 1972 में कबड्डी का गेम खेलते हुए कमांड तक टुरनामेंन्ट में गेम खेलते हुए अपना व अपनी बटालियन का नाम रोशन किया।
  • सन् 1972 में ढाब-ढाणी में हुए कबड्डी कॉलरशिप में मनसरबास की टीम की तरफ से प्रतिनिधित्व करते हुए फाइनल मैच में रोहतक की टीम को हराकर मैन ऑफ दा कॉलरशिप का खिताब अपने नाम करते हुए क्षेत्र में परचम लहराया। 
  • सन् 1987 में पाकिस्तान के साथ फिर से युद्ध होने की संभावना हुई। उस समय मैनें जैसलमेर बोर्डर का मोर्चा संभाला। बाद में पाकिस्तान के हार मानने के कारण युद्ध टल गया। 
  • सन् 1995 में चीन बोर्डर पर अरूणाचल प्रदेश में वार ऑफ मिशन में पुर्ण हथियाबद्ध तकनीकी का काम करते हुए आर्मड आर्टी इनफैन्ट्री के तमाम हथियार युद्ध के लिए फिट-फार करते हुए मैडल व एच/लैफ्टिनैंट पद से नवाजा गया।
                                                                                                                                                           
                         भीम सैन शर्मा                          
रिटायर्ड एच/लैफ्टिनैंट (ई.एम.ई)