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दैनिक जागरण ने फौजी भीम सैन को सांझी में उकेरा...

दैनिक जागरण ने फौजी भीम सैन को सांझी में उकेरा...

                    पराक्रमियों की इस धरा पर अनेक वीर सपूत ऐसे भी हुए हैंए जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के साथ.साथ अन्य क्षेत्रों में भी अपना लोहा मनवाया है। भिवानी जिले के गांव लालावास के एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में 1950 में जन्मे भीम सैन ने भी बॉर्डर पर मोर्चा संभालने के साथ.साथ सेना में पहलवानी में भी लोहा मनवाया। अपने पिता चंदगी राम शर्मा से प्रोत्साहन पाकर इन्होंने गांव का नाम रोशन किया। इनका पूरा परिवार ही देशभक्तिए संस्कृतिए अध्यात्म और खेल.खेती की मिसाल कायम करता है।
पहले खेती ही परिवार की आजिविका का एकमात्र साधन था। सैनिक बनने के सपनों को पंख लगाते हुए मात्र 19 वर्ष की आयु में भीम सैन भारतीय सेना में भर्ती हुए। इन्होंने भारतीय सेना में ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी अपनी पहलवानी के जौहर बिखेरते हुए किर्तिमान स्थापित किए। भीम के चाचाजी हुक्मीचंद आर्य भी एक प्रसि़द्ध भजनोपदेशक थे। उनकी ख्याति आज भी हरियाणा समेत राजस्थान में दूर.दूर तक विद्यमान है। पांच पुत्रों की माता लिछमी देवी जहां धार्मिक प्रवृत्ति की रहींए वहीं भीम सैन की पद्वी लक्ष्मी देवी भी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला है। भीम सैन आज भी सुबह चार बजे उठकर लालावास से सटे खेतों.गांवों तक दौड़ लगाते हुए अपनी दिनचर्या का श्रीगणोश करते है। वे अपने सैन्य जीवन और पहलवानी के अनुभवों को युवाओं के साथ साझा करते हुए उन्हें प्ररित करते हैं।

भीम सैन शर्मा की कलम से...
1971 में भारत का युद्ध पाकिस्तान के साथ हुआ। उस समय मैंने डेरा बाबा नानक बॉर्डर पर मोर्चा सम्भाल रखा था। वर्ष 1971 में 3 दिसम्बर से 15 दिसम्बर तक लगातार 13 दिनों तक युद्ध चला। इस दौरान बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद करवाया गया। इस युद्ध में 93 हजार पाकिस्तान के जवान जेसीओण् ऑफिसरए आर्मी कमांडरए लेफ्टिनेंट जनरलए समेत कई को पकड़कर दिल्ली लाया गया। सन् 1972 में कबड्डी में अपना व अपनी बटालियन का नाम रोशन किया। 1972 में ही ढाब.ढाणी में हुए कबड्डी खेलों में मनसरबास की टीम की तरफ से प्रतिनिधित्व करते हुए फाइनल मैच में रोहतक की टीम को हराकर खिताब पाकर परचम लहराया। सन् 1987 में पाकिस्तान के साथ फिर से युद्ध होने की संभावना हुई। उस समय मैंने जैसलमेर बॉर्डर का मोर्चा संभाला। बाद में पाकिस्तान के हार मानने के कारण युद्ध टल गया। सन् 1995 में चीन बॉर्डर पर अरुणाचल प्रदेश में वार ऑफ मिशन में पूर्ण हथियारबंद तकनीकी का काम करते हुए आम्र्ड आर्टी इनफैन्ट्री के तमाम हथियार युद्ध के लिए फिट.फार करते हुए मेडल व एचध्लेफ्टिनैंट पद से नवाजा गया। अपने देश और गांव के लिए हमेशा युवाओं को प्रेरित करना ही आगे का ध्येय है।
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