Thursday, January 1, 2015


लालावास में नव वर्ष मनाया अनोखे अदांज में...

कहते है कि ‘‘गौ हमारी माता है।’’ लेकिन आज के इस युग ने इस ‘कहावत’ को ‘कहावत’ तक ही सीमित रखा बजाय उस ‘कहावत’ पर अमल करने के। हम आस पास कहीं भी इस सोच के ऊपर गौर करके देख सकते है। अतंतः हमें यहीं नजर आएगा कि ‘गौ माता’ का कहीं पर भी सम्मान नहीं हो रहा है।
लालावास के ग्रामीणों में दिखी ‘गऊ माता’ के प्रति पहल...
‘गऊ माता’ के प्रति लालावास गाँव के ग्रामवासियों की पहल देखने को मिली है। मौका था साल 2015 के नव वर्ष के आगमन का। लालावास में नव वर्ष के अवसर पर इस बार ग्रामवासियों का रूझान गौमाता की तरफ देखने को मिला। वैसे तो लालावास में नव वर्ष बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है परतुं हर वर्ष की भांति इस साल गाँव लालावास में नव वर्ष मनाने का अदांज ही कुछ अलग था। हर वर्ष की भांति साल 2015 के आगमन पर भी लालावास में जश्न का माहौल था। इस बार मौका था ‘गौ माता’ के साथ धर्म-पुण्य कमाने का। जिसके प्रति ग्रामवासियों काफी उत्सुक नजर आए। गाँव के तमाम लोगों की मदद से गाँव के प्रत्येक घर से चंदा एकत्रित किया। सभी श्रद्धालुओं ने अपनी इच्छा अनुसार गौ माता के प्रति दान किया। फिर तमाम ग्रामवासियों की मदद से आवारा पशुओं के लिए एक सुरक्षित जगह का बंदोबस्त किया। फिर पशुओं के लिए चारा, पानी इत्यादि का भी पुख्ता इंतजाम किए गए। पानी की आपूर्ति के लिए स्पेशल एक पाईप पशुओं तक पहुँचाई गई ताकि पशुओं को उचित समय पर उचित मात्रा में पानी मिल सके। देखते ही देखते मुहिम जोर पकड़ गई। अततः नये साल का ‘सेलिब्रेशन’ अजब-गजब बन गया। आवारा पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए है। पशुओं के प्रति इस सवेंदनशीलता का पुरा श्रेय गाँव लालावास के तमाम ग्रामवासियों को जाता है। बहरहाल इस मुहिम से न केवल लालावास के आवारा पशुओं से निजात उम्मीद जगी है वहीं नव वर्ष के पावन अवसर पर इन बेजुबान पशुओं के लिए छेड़ी गई मुहिम से उन्हें अब भरपेट चारा तथा आश्रय भी मिल सकेगा। अब देखने वाली बात यह है कि सरकार के कानून से पहले ही शुरू की गई यह मुहिम कितनी कारगर शाबित होगी। आशा करते है कि यह मुहिम सालों साल बढती चले जिससे बेजुबान पशुओं की यह आवारा हालत सुधारी जा सके।
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